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एक कविता पेड़ के लिए

                
                                                         
                            मैं चाहता हूँ कि
                                                                 
                            
मेरे मरने के बाद,
मेरी चिता में लकड़ियाँ नहीं,
कुछ किताबें रखी जाएँ।

क्योंकि काग़ज़ भी
कभी पेड़ों का हिस्सा था,
और मैं नहीं चाहता
कि मेरे लिए
एक और पेड़ कटे।

जिन पेड़ों ने
हमें साँस दी है,
उनकी शाखों को
मेरी आख़िरी यात्रा का
ईंधन न बनाया जाए।

मेरी देह तो
एक दिन मिट्टी में मिल जाएगी,
पर मेरी यह छोटी-सी इच्छा
शायद किसी पेड़ को
ज़िंदा रहने दे।

बस इतना करना—
मेरे जाने के बाद भी
किसी पेड़ को
मेरे कारण मत गिराना।
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4 घंटे पहले

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