झूठ का स्वाद चखकर
मेरी जीभ भी नींद में डूब रही है;
अब प्रतिवाद करने में असमर्थ है।
अन्याय ही इस दुनिया पर राज करे,
अत्याचार ही अपना ताज पहने;
मेरे अस्तित्व की हड्डियों में
बस एक क्षणिक चुभन
ही शेष रह गई है।
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