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बाल-अधिकार से बिगड़े बच्चे, बच्चों पर ही हिंसक सुंदर केरल

                
                                                         
                            "बाल-अधिकार की शब्दावली में पले नन्हे हाथ,
                                                                 
                            
अब दूसरे नन्हे हाथों की धड़कन जाँचते हैं।
पोस्टरों में अब भी मुस्कुराता है सुंदर केरल,
पर गलियों में डर की नमी फैलती जा रही है।
डाँट एक आपराधिक फुसफुसाहट बन गई,
सीमाएँ—पुरानी नैतिक कथाएँ।
स्कूल रजिस्टरों में सुरक्षित हैं बच्चे,
आँगनों में घायल पड़ी है मासूमियत।
कानून चमकता है फ़ाइलों की रोशनी में,
और समय—बच्चों के ख़िलाफ़ गवाही देता है।"
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6 महीने पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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