"बाल-अधिकार की शब्दावली में पले नन्हे हाथ,
अब दूसरे नन्हे हाथों की धड़कन जाँचते हैं।
पोस्टरों में अब भी मुस्कुराता है सुंदर केरल,
पर गलियों में डर की नमी फैलती जा रही है।
डाँट एक आपराधिक फुसफुसाहट बन गई,
सीमाएँ—पुरानी नैतिक कथाएँ।
स्कूल रजिस्टरों में सुरक्षित हैं बच्चे,
आँगनों में घायल पड़ी है मासूमियत।
कानून चमकता है फ़ाइलों की रोशनी में,
और समय—बच्चों के ख़िलाफ़ गवाही देता है।"
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