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मेरे अल्फाज़

कुछ शेर

Binod Kumar

114 कविताएं

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किसीको को किसीकी जरूरत नहीं है
मोरवत नही है मुहब्बत नहीं है

बिन मांगे लोग बहुत सलाह देते है
मदद मांगो तो लोग कराह देते है


सहता रहा हर सितम पर आह नही की
गरीबी मे भी हमने गुनाह नहीं किया

रुठने मनाने मे कुछ वक्त अजमाने
बहुत कम वक्त है मुहब्बत करने को जमाने मे

बहुत कठिन है दिल मे उतरना ,असान नहीं है
दिल दे के दिल लिया ,कोई एहसान नहीं है

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