किसी को पाना नहीं उसका साथ होना काफी है
पास ना होकर भी हर पल अहसास होना काफी है।
जिसके माथे की इक सिकन व्यथित कर जाए मन
जिसकी हर अनकही बातें भी समझ जाए ये मन।
जो आंखों से बोले और आंखें सुनने लगे
बंद आंखें भी जब उसका दीदार करने लगे।
दिल, अवगुण से भी उसके प्यार करने लगे
जिसकी मुस्कान से जिंदगी संवरने लगे।
जिसका हर गम अपना और खुशियां सबकी लगे
जिसकी सूरत देख सुबह हो और रात झपकी लगे।
जो सबका हो कर भी मुझ में शेष हो
मेरी हर इक उपलब्धि से भी विशेष हो।
हर अवसर में जो खास हो
जिस पर अटूट विश्वास हो।
ऐसे निष्ठा प्रेम समर्पण को
सदा प्रभु का आशीर्वाद हो।
-बीना राजन मिश्रा
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