कब होते हैं शब्द बेअर्थ
बीत गये ? या रहें असमर्थ
कब होते हैं शब्द बेअर्थ?
माना जाता उन्हें नि:अर्थ?
गर वर्ण , होवें बेमेल
सन्दर्भहीन, ध्वनि का खेल
सार्थक पीछे जुड़े निरर्थक
होते सब ये शब्द बेअर्थक।
निरर्थक के भी होते अर्थ
जुड़कर पीछे शब्द समर्थ ।
ईश्वर, वाणीहिन,एक शब्द
मुक्तीदाता सार शब्द
शब्द बिना आत्मा अंधी
बिना शब्द माया से बंधी
योगी, कवि शब्दों के साधक
संवेदी, एकाग्र अराधक
शब्द चयन और भाव पीरोना
सत्य अन्वेषी दोनों का होना।
शब्द करे ओजस्वी वाणी
शब्द चलते संचारी प्राणी
शब्द सार्थक,स्वतंत्र इकाई
भाषा बन करता अगुआई
शब्द नहीं " बेअर्थ" मेरी रानी
युग्म रहें ,या भावना बहानी
शब्दअंश, या निरर्थक शब्द
संलग्नता ही प्रायश्चित, प्रारब्ध ।।
शायद उसका सही है ख्याल
बीता समय, बस बचा मलाल
शब्द विजय,असमर्थ रहा था
हैं बहुत, पर बेअर्थ कहा था।।
अब सब नीरव,नीरस,नि:शब्द।
आश बस एक सार शब्द।।।
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