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मै दौलत का गरीब हूं

                
                                                         
                            मैं दौलत का गरीब हूँ,
                                                                 
                            
मगर दिल का अमीर हूँ,
निगाहें टिकी हैं मंजिल पर,
मगर कभी बेचा नहीं ज़मीर हूँ।

उसूल है मेरा भूखा सो जाना,
मगर किसी का हक़ न मारना,
कभी हाथ फैलाया नहीं जीवन में,
मगर भूला नही अपनों पर हक़ जताना।

मुश्किलों से मेरा रिश्ता है,
मगर हौसलों से पहचान है,
चाहे कितने तूफ़ान आएँ राह में,
मेरे उसूल ही मेरी शान हैं।

साहिल के किनारे बैठकर,
मन को थोड़ा रिचार्ज करता हूँ,
अभी सफ़र बाकी है मेरा,
यही कहकर खुद को तैयार करता हूँ।

मंजिल भले ही दूर हो,
मैं हिम्मत हारने वाला नहीं,
दौलत भले ही कम हो पास,
मैं ज़मीर बेचने वाला नहीं।

भूखा रह लूँगा, झुक भी लूँगा,
पर ग़लत के आगे झुकूँगा नहीं,
मैं दौलत का गरीब सही,
मगर अपने उसूलों में कभी गरीब नहीं।
- भुनेश्वर अनंत 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 hours ago

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