जिंदगी यूं न बसर कर यारो
एक बार आसमान में तो नजरे गड़ा ।
खिंच लेंगे तेरे चाहने वाले
एक बार अजमा के बात तो अड़ा ।।
चुपचाप बैठने से अच्छा
हारकर तो बैठ जा ।
होगा नाम तेरा
सोच में ना डूब अभी तो लगजा॥
कहने वाले तो कहते रहेंगे
समझ ईशारा खोल रहा तेरा रस्ता ।
पायेगा मंजिल जब
यहीं कहेंगे वाह! भई वाह! है कितना मस्त।।
-भुनेश्वर अनंत
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X