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अवसाद

                
                                                         
                            क्यो सब कुछ पा लेने के बाद भी मन उदास सा रहता है? क्यों?
                                                                 
                            
एक चीज को कर लेने के बाद वह कार्य अधूरा सा भाता है।

ना जाने अब किस अंधेरे से मन घिर सा गया है।
कि अब इससे बाहर निकलना भी चाहूं तो एक अजीब सा डर सताता है।

आखिर क्यों मेरा दिल उस खुशी को प्राप्त नहीं कर पाता है।
जिसे कि वह करना चाहता है।

ना जाने क्यों? एक अजीब सा गम सताता रहता है।
अब तो दिल भी भरा-भरा सा रहता है।

क्यों मेरा मन इस अवसाद से बाहर नहीं निकल पाता है
आखिर क्यों मुझे यह अब एक बंधन सब भाता है।

डर की जंजीरों से बंधा लगता है अब यह मस्तिष्क मुझे मेरा।
कि अगर खुश होना भी चाहूं तो वह मुझे ओर
उन डर की जंजीरों से जकड़ता जाता है।

ना जाने यह कैसा एहसास है जो कि हर पल रुलाता रहता है।
आखिर क्यों मेरा मन इस अवसाद से बाहर निकल नहीं पाता है
इस अवसाद से बाहर निकल नही पाता है

भूमिका वासवानी
वेस्ट विनोद नगर, दिल्ली
 
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5 वर्ष पहले

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