चाँद की चाँदनी बिखरी जमीं पर,
साँझ की चुप्प में सुनहरी सैर।
नीले आसमां की गोद में वो चमके,
जैसे रूह की हर ख्वाहिश में घर करे।
तारों के संग वो हँसता मुस्कुराए,
रात की गहराई में उम्मीद जगाए।
चुपके से ढकेरे सब दुखों के पंख,
सपनों की नगरी में ले जाए मन का रंग।
चाँद, तुझमें ही बसे हैं सुकून के हर रंग।
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