कभी-कभी कहीं भी ना जाया जाए
सिर्फ़ खुद को ही खुद का वक़्त दिया जाए
बस शर्त इतनी है कि उसमें किसी भी गैजेट्स से दूर बस खुद को खुद के या प्रकृति के साथ, बिना तस्वीर और वीडियो लिए रहा जाए
जिससे अपनी तस्वीरों को देखने या किसी को भी दिखाने की जिद और जल्दी ना होगी
तब कहीं भी ना जाकर भी तन-मन में निर्मल आनंद की नीरव शांति होगी
यही वह समय होगा जब शुरू होगा अपनी ही भावनाओं को समझना, थोड़ा समझाना और उन्हें उलझन से बचाने का दौर
इस तरह ही कभी-कभी खुद के साथ बिताए लम्हों से ही लौटेगा, तन-मन का नूरे-सुकून जिसके लिए फिर कहीं ओर ना भटकने की जरूरत होगी
कभी-कभी कहीं भी ना जाया जाए
सिर्फ़ खुद को ही खुद का वक़्त दिया जाए
-भावना नेवासकर
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