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तन्द्रिल

                
                                                         
                            आजादी के पूर्व हम जगे हुए थे
                                                                 
                            
आजादी के बाद हम लोग सोए हुए हैं
जब हम गुलामी के बेडियों बन्धे हुए थे
हमारा हिन्दी साहित्य में वीररस छाई थी
देश के लोगों का हूजुम सड़कों में छाई थी
"भारत छोड़ो "आन्दोलन शिखर में था
देश में जगह-जगह लोगों का हुजूम था
आजादी के मतवाले अंग्रेज़ी शासन को
तोड़ने में अपनी जान कुर्बान कर रहे थे
अंग्रेजी शासक अपने-आप में लाचार थे
आजादी के परवाने आग में जल रहे थे
आजादी के मतवाले कोर्ट व सरकारी
भवनों ,सरकारी अफसरों और पुलिस के
ऊपर हमला कर नुकसान पहुंचा रहे थे
साथ में अंग्रेजों देश छोड़ो नारा बुलंद कर
अंग्रेजी सेना से डंडा और गोली खा रहे थै
आजादी के बाद सब जगह शांतिपूर्ण है
अब भारत की जनता सो गई है
उसी तरह भारत में साहित्य तन्द्रिल हो गई
उनींदे आंखों को स्वच्छ एवं निर्मल साहित्य
पानी रुपी के छिंटा मार कर जागृत करना है
- भागवत प्रसाद नायक
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10 महीने पहले

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