दीपावली के बाद
कार्तिक मास के बाद
प्रारंभ हुई शरद
सूरज का धूप लगा प्यारा
धूप लगी सुहानी
खुल गये कपड़े का पिटारा
बगिया के सुमन मुस्कुराने लगे
चिड़ियां चहचहाने लगे
धरती पहनी रंगबिरंगी सारी
महक उठी बगिया और आंगन सारी
बहक गया मन
चंचल हो गया तन
सायंकाल सूरज जल्दी अस्त
ठंड से ठुठरन हुई प्रारंभ
सब गरम कपड़े संदूक हुए बाहर
सिर से पैर तक ढंककर निकलना बाहर
अलाव की ताप सुहाना लगे
सड़कों में जानवर कहीं दुबकने लगे
अब जल्द संध्याकाल में पड़ी सूनी
मस्त हुए फकीर जलाए धुनी
गांजे का कश लगाए फकीर
उनकों मजा आने लगा
अब कहाँ जाएं गरीब
अब समाजिक संस्थान सक्रिय हुए
सड़क किनारे सोए गरीब
बटने लगे कंबल
अमीर हुए सोए गरीब
कई संस्थान बांटे कम्बल
एक गरीब को मिला कई कम्बल
गरीब बीचारा क्या करेगा इतना कम्बल
नये-नये कंबल कम दाम उसी दुकानों बेच कर
गरीब बन रहे हैं अमीर
उन्ही दुकानों से दूसरे संस्थान
पुनः खरीद कर बांट रहे हैं
यों तो ऐसा हो गया
जादू का वाटर आफ इंडियां
ऐसे जादू तो होते रहते भारत में
गरीबों राशन गायब हो जाता है
जैसे मतदाता सूचि से मतदाता गायब हो जाता है
यह भारत देश है
सबके पास जादुई चिराग है
जीन उसमें से निकलता है
और बोलता है
" क्या चाहिये हुजूर "
कोई राशन की मांग करता है
दुकान से राशन गायब हो जाता है
कोई सोने की मांग करता
बैंक से सोना गायब हो जाता है
यह जादुई देश है
आंतकवादी साधु के वेश में है
चोर-उच्चके नेता के वेश में
तो बैंक से सोना गायब हो जाता है
क्योकि नहीं रहता है कम्बल
उन गरीबों के पास
स्थाति ऐसी हो जाती है
कि दुकानदारों कमी नही होती है
किसी गरीब पास कभी नहीं रहता कम्बल
ठंड तो अमीरों के लिए नहीं होता है
वह तो गरीबों के ठंड बहुत होता है
सैकड़ो गरीब ठंड के दिनों में
सड़क में रहने वाले गरीब
के लिये श्राप होता है
सर्द रातों में कई गरीब
सड़क में सोते-सोते स्वर्ग सिधार जाते हैं
कई लोग उनके भलाई के लिए काम करते हैं
सरकार भी उनके सर्द रातों के लिये
जगह-जगह चौक में रात भर
अलाव जलाया जा रहा है
रात्रि विश्राम के लिए
गर्म कमरों का व्यवस्था हो रहा है
पर जाने क्यों? गरीब इसे नहीं जानते हैं
प्रारंभिक शिक्षा के न होने के कारण
सरकारी सहयोग से अनभिज्ञ रहते हैं
देश के उत्थान के लिए शिक्षा जरुरी है
- भागवत प्रसाद नायक
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