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सहजता

                
                                                         
                            हवा की तीव्र झोका से छाये बादल घनी हो रही है
                                                                 
                            
बीच-बीच में बादल के टकराव से गर्जना हो रही है
लपकती दामिनी आकाश को चकाचौंध कर रही है
धरती में गर्जना और दामिनी भयभीत कर रही है
वर्षा की बड़ी-बड़ी बूंदें जमीन पर गिर रही है
गर्जना तथा बिजली की चमक बंद हो गई
सूर्यदेव के रोशनी आकाश को प्रकाशित हो गया
पृथ्वी दोनो छोरों जोड़ेंती इन्द्र धनुष की छटा
मनोरम, सुहानी ,मनभावन ,आकर्षक, हो गई छटा
मन में जो अन्तर्वेदना उमड़-घुमड कर सहज हो गई
-भागवत प्रसाद नायक
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10 महीने पहले

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