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प्रातःकाल

                
                                                         
                            सूर्य लालिमा लिए प्रातः उदय हो रहा था
                                                                 
                            
विस्तृत आसमान में लालिमा छाई हुई थी
कहीं-कहीं पर आसमान झांक रही थी
पक्षियों की कलरव और मंद-मंद समीर
मन और तन को शांति प्रदान कर रही थी
गांव की गोरियाॅ बतियाती हुई
नहाने के लिए तालाब के पचरी बैठी थीं
गाते हुए हलकारे बैलों को हल फांदे
अपने -अपने खेत को जोतने जा रहे थे
चरवाहे अपने गाय-बैल और भेड़-बकरी
की झुंड को चराने के लिए ले जाते हुए
गांव का प्रातःकालीन यह नजारे बहुत
मोहक और आकर्षक मन मोहक होते थे
- भागवत प्रसाद नायक
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10 महीने पहले

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