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मृत्यु की बाधाएं

                
                                                         
                            मृत्यु की यहाॅ तक तारिख तथा समय
                                                                 
                            
भी निश्चित कर रखी है विधाता ने
मृत्यु लोक में मृत्यु होना ही है
तो मनुष्य ही समझदार जीव है
इस लोक में मनुष्य ही बहुत कुछ कर सकता है
जब सात विभिन्न जीवों के रुप जन्म लेने
पश्चात यह मनुष्य रुप मे जन्म लिया रहता है
उसके जीवन में पुण्य प्राप्त करने अवसर रहता है
इस अवसर का लाभ उठाना बनता है
क्यों न इसका दूसरा जीवों की सेवा कर
अपने जीवन की सार्थकता बनाए रखें
इस लोक में अपना नाम जरुर अमर कर सकते हैं
ईश्वर भी इस लोक में जन्म लिए हैं
और मृत्यु निश्चित रुप से हुई है
पर उनका नाम और काम अमर है
भागवत गीता में उल्लेख कि श्रीकृष्ण
की मृत्यु बहेलिया की बाण से हुई थी
पर अब भी अमर हैं
हम भी अमर क्यों हो सकते हैं ?
- भागवत प्रसाद नायक
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10 महीने पहले

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