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मादक हाला

                
                                                         
                            पी के हम जब मस्त हो गये हाला
                                                                 
                            
घनी घनघोर अंधेरी रात में
मदमस्त, लड़खाते पहुंचा घर में
पत्नि उठाई चप्पल चटाक-चटाक से
लगाई बदन में इधर-उधर
लड़खडाते कदम सीधे हो गये फटाक से
मैं पत्नि का अनुनय करने लगा
पर पत्नि परेशान थी इस आदत से
मैने कसम भगवान का खाने लगा
वो अडिग थी न मानने वाली थी
अब तो कोई अवसर नही मिलने वाली थी
इधर-उधर देखाऔर सम्पूर्ण शलणागत हौ चरणों में
मां काली की अवतार में परिवर्तन दिखा
पत्नि शैनेः शनेः शांत हो रही थी
कुछ देर बाद महालक्ष्मी नजर आ रहीं थी
तब मैने बताया आज के घटना की
भाऊ मिले थे आफीस के बाहर
चेहरे बहुत उदास लग रहे थे
चल रे कहीं चलते बाहर
आज कुछ पी लेने मादक हाला
वहां पर कुछ ज्यादा हौ गया
ऐसी हो गई बहुत बड़ी गडबड झाला
-भागवत प्रसाद नायक
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8 महीने पहले

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