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कुछ तुम कहो, कुछ हम कहें

                
                                                         
                            दिल की बात कुछ तुम कहो ,कुछ हम कहें
                                                                 
                            
कुछ गिले -शिकवे बात करें ,तुम पहले कहो
ऐसा लगता है कि तुम्हें कोई शिकायत नहीं है
मुझे तो बहुत शिकायत रही है तुम्हारी चुप्पी
कुछ तो शिकायत है हमसे चुगली कर रही चुप्पी
दिल में गुरेज पालना जीना मुहाल कर देगा
दिल मसोस कर मत जीयो ये मुहाल कर देगा
दिल की बात कुछ तुम कहो, कुछ तुम कहो
चमन के फूलों से षूछो कि तुम क्यों खुश रहते हो
जब कल जमीं मिल जाना है इसे तुम जानते हो
फूल ने कहा कि कल की फिक्र क्यों करे ?
जब तक जिन्दा हैं तब तक खुश रहें
कम से कम फूलों से कुछ सीखो जीना
लिखी किस्मत को न जानो तुम न हम
आपस में मोहब्बत बाटें न कि गम
अब आओ हम दोनों घुलमिल आजाद जीये
अब खामोश मत रहो अब भी कुछ कह दो हमैं
दिल की बात कुछ तुम कहो,कुछ हम कहें
- भागवत प्रसाद नायक
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10 महीने पहले

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