मेरी आंकाछाएं अधूरी रह गई
जैसे कबूतर उड़ने के लिए फड़फड़ाते हैं
उसी तरह मैं फड़फड़ाता हूं
नई आंकाछा खोज भी अधूरी रह गई
मेरे मस्तिष्क में उथल-पुथल मची है
नये विचार से मैं शांत हो गया
दीमाग की खलबली थम गई
और नये सपनों में खो गया
मैं देखा कि कबूतर शांत हो गया
और दाना चुगने लगने लगा
और फिर फड़फड़ा कर उड़ गया
फिर भी मेरा मन शांत था
विचारों का तूफान भी शांत था
मॅने भी फड़फड़ा कर उड़ने ठान ली
और मैं अपने माता-पिता के पास
वर्षों बाद विमान से उड़ गया
- भागवत प्रसाद नायक
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