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जीने का मकसद

                
                                                         
                            मेरे जीने का मकसद बताओ दोस्तों
                                                                 
                            
मैं क्यों जी रहा हूं
सिर्फ खाने-कमाने
मौज-मस्ती करने
आखिर पैदा क्यीं हुआ हूं
नहीं
केवल इस कार्य के लिए
कुछ करना हैं
लोगों के लिए
देश के लिए
समाज के लिए
नही
अपने संतुष्टी के लिए
.मुझे संतुष्टी किसमें मिलेगी
क्यों न साधु-संत बन जाऊं
यही सही है
मैं ज्ञान प्राप्ति के लिए
गुरुदेव के खोज में निकला
सबसे पहले हरिव्दार गया
वहां पर पावन गंगा किनारे
निश्चल मन और तन से
ध्यानस्थ हुआ
हृदय के अंतस्थल से
आवाज आई
पुत्र तू लौट जा
अपनी दुनियाः में
और दीन-हीन की सेवा कर
तुम्हारा लक्ष्य है
खुब कमा और
दीन-हीन की सेवा कर
मुझे अपना लक्ष्य मिल गया
मैं दीनबन्धु बन गया हूं
और मैः संतुष्ट हूं
-भागवत प्रसाद नायक
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7 महीने पहले

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