आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

झुका हुआ कोई नहीं

                
                                                         
                            इस विश्व में झुका हुआ कोई नहीं
                                                                 
                            
सब अपने के साथ जीना चाहते हैं
पर कुछ बड़े लोग, लोगों को झुकाना चाहते हैं
अपने वर्चस्व को बचाने के लिए
अपने प्रतिद्वंदी को झुकाना चाहते हैं
क्यों न झुकाने की कोशिश करें?
वे अपने अहंकार से चूर होते हैं
जब अहंकार की जमीन खिसकती है
उस जमीन को बचाना चाहते हैं
तो उनका प्रयास दुसरे की टांग खिचने का रहता है
वर्चस्व की सबको पुरजोर लड़ना चाहिए
पर दूसरे को गिराकर या टांय खींच कर कदापि नहीं
झुका हुआ कोई नहीं, कदापि नहीं
अवनत होना का मतलब झुक जाना नहीं
सभ्रांत का तात्पर्य विनयशील हो जाना
हमें हमेशा विनयशील, मधुर संभाषण रहना ही चाहिए
- भागवत प्रसाद नायक
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
7 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर