इस विश्व में झुका हुआ कोई नहीं
सब अपने के साथ जीना चाहते हैं
पर कुछ बड़े लोग, लोगों को झुकाना चाहते हैं
अपने वर्चस्व को बचाने के लिए
अपने प्रतिद्वंदी को झुकाना चाहते हैं
क्यों न झुकाने की कोशिश करें?
वे अपने अहंकार से चूर होते हैं
जब अहंकार की जमीन खिसकती है
उस जमीन को बचाना चाहते हैं
तो उनका प्रयास दुसरे की टांग खिचने का रहता है
वर्चस्व की सबको पुरजोर लड़ना चाहिए
पर दूसरे को गिराकर या टांय खींच कर कदापि नहीं
झुका हुआ कोई नहीं, कदापि नहीं
अवनत होना का मतलब झुक जाना नहीं
सभ्रांत का तात्पर्य विनयशील हो जाना
हमें हमेशा विनयशील, मधुर संभाषण रहना ही चाहिए
- भागवत प्रसाद नायक
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