इन्तजार कहीं कहीं ही अच्च्झ लगता है
इन्तजार प्रेमिका का हो तो अच्छा लगता है
अफसर से मिलने का इन्तेजार ऊबाऊ लगता है
कोर्ट में फैसले का इन्तजार में डर लगता है
डाक्टर से मिलने का इन्तजार मैं बैचेनी होती है
वकील से मिलने का इन्तजार मंहगा पडता है
बहुत बीमार मरीज को मौत का इंतजार
प्राण निकलते तक मुझे अनुभव नहीं है
- भागवत प्रसाद नायक
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X