देश का नवयुवक निराश है
सरकार से नहीं मिल रही है आश
सरकारी नौकरी का तोड़ा है
मितव्ययिता एक रोडा है
निजीकरण सरकार की है. मजबूरी
नवयुवकों से बना रही है दूरी
निजी संस्थान कर रहें है
मानव संसाधन में कमी
अतः रोजगार में आई कमी
पढ़े -लिखे ज्यादातर बेरोजगार
लिखे -पढ़े कम बेरोजगार
काम कर रही है सरकारी नीति न
कामगार को प्रशिक्षण
उसके बाद वित्त पोषण
बढ रहा उनका कारोबार
कमाई की बढी रफ्तार
पढ़े-लिखे खोज रहे बढी नौकरी
उससे कम की उन्हें नहीं मंजूरी
इंजिनियरिंग स्नातक, स्नातकोत्तर
में घमासान जद्दोजहद
क्योंकि उन्हें मिल रहा है छोटे पद
उन्हे नहीं होना चाहिए निराश
कुछ न कुछ मिलेगा नगद
न करो मन को निराश
आशा से आकाश थमा है
नवयुवकों, आपके के कंधे
देश का भार थमा है
जय किसान, जय नौजवान
- भागवत प्रसाद नायक
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