जीना हे तो बिन्दास जीयो
डर डर कर जीना व्यर्थ है
ये जीवन है, इस को हम लिख सकते
जब जब जो जो होना है हम रोक सकते
हमें खुल कर बिन्दास जीना चाहिए
अपने शौक को पूरा करना चाहिए
क्यों डरना एक दिन सबको मरना
न बहाये मुफ्त में आंसू की झरना
जीवन में दुख तो आना ही है
उसके लिए दुखी नहीं होना चाहिए
मन-तन को मजबूत बनाना चाहिए
एक दिन दुख को जाना ही होगा
और सुख आयेगी ही आयेगी
डर कर जीना क्या जीना है?
मस्त रहो,प्रसन्न रहो ,बिन्दास जीओ
एक दिन सबको मरना हैं
छोडो सब डर को बिन्दास जीओ
डर डर कर मत जीओ
बिन्दास जीओ
-डाॅ भागवत प्रसाद नायक
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