जनाजा निकाला एक आशिक का
जिन्दादिल आशिक दिलफेंक का
मुंडेर पर खड़ी कई नववौयना
आंसुओ से विदा की बेफिक्र आशिक का
- भागवत प्रसाद नायक
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X