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अधिवास

                
                                                         
                            कमरा अधिवास से भर गया जब तुमने प्रवेश किया
                                                                 
                            
टिक गई नजरें सबकी तुम पर जब तुम प्रवेश किया
जब हवा का एक झोका आया जुल्फें बिखर गई
पूरा ढक गया मुखड़ा मानो स्याह बादली छा गई
अनसुलझी बालों गुच्छा चांद सा मुखड़े पर छा गई
अफसोस मुझे खूब हुआ यह नजारा देख कर
कोफ़्त हुआ मुझे ढंका हुआ था चेहरा देख कर
मुखड़ा के दीदार न होने से मैं निराश खूब हुआ
खुदा मेहरबान तो गधा पहलवान चरितार्थ हुआ
ठीक उसी समय उसने जुल्फों को पीछे झटका
मानो खूबसूरत चेहरा ले कर स्वर्ग से आई हो
अधिवास फैली चहुंओर मानो अफ्सरा आई हो
- भागवत प्रसाद नायक
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10 महीने पहले

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