प्रेम रस की स्त्रोत है अधर मानो कुछ कहने को है
प्रेमी इंतजार में है कि प्रेमिका मानो कुछ कहने को है
उन्हें कुछ कहना है पर प्रेमी को वहुत कुछ कहना हैं
पल-पल पहर सा लग रहा है पर वो चुप्पी साध रखी है
प्रेमी दम साध रखी थी पर कब तक वह सब्र रख सकता है
आखिर प्रेमिका उसके पास धीरे- धीरे खिसक रही थी
प्रेमी चहेरे में स्मित मुस्कान इस बात की पुत्री थी
वह अब आश्वस्त हो गया कि जबाव उत्साहित होगा
एकदम नजदीक आने के बाद प्रेमी को चुम्बन दिया
प्रेमी एकदम उत्साहित होकर प्रेमिका को चुम्बन दिया
- भागवत प्रसाद नायक
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