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आमोद-प्रमोद

                
                                                         
                            सब जाग जायें, आमोद-प्रमोद का वक्त समाप्त हुआ वक्त प्रारंभ हुआ जागृति का ,जग कर उठने का
                                                                 
                            
सो न पथिक यात्रा जटिल हे और उलझो न बैठने में
भोर हो गया जवान सो रहें हैं , वक्त नहीं है सोने का
जीवन भर सोने का वक्त पडा है, सीमाओं रक्षा का
बीत न जाए समय , हमला कर दे दुश्मन सीमाओं में
हृदय स्थल रिक्त पडा है सुरक्षा देश के वाशिंदो का
पल-पल स्थित पता नहीं कौन बन जाए दुश्मन देश का
छुपा हुआ है दुश्मन आस्तीन का सांप बन कर
जगह-जगह आतातायी घुसपैठिएं आंतकवादी बन कर
सावधान ! खबरदार ! रक्षा कर देश के अस्मिता का
नागरिक भी सजग रहे ,सवाल है देश की अस्मिता का
- भागवत प्रसाद नायक
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9 महीने पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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