आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

खिलते- मुरझाते फूल

                
                                                         
                            खिलते-मुरझाते फूल
                                                                 
                            

जब-जब खिलते हैं फूल,
फूलों से ज्यादा प्रसन्न,
उनको खिलते हुए देखने वाले होते हैं।

और जब-जब मुरझाते हैं फूल,
फूलों से ज्यादा उदास,
उनको मुरझाते हुए देखने वाले होते हैं।

मैं इन दोनों स्थितियों से गुजरा...
मैंने फूल खिलते हुए भी देखें
और मुरझाते हुए भी!

खिलते हुए फूलों ने मुझे,
क्षणिक खुशियाँ दी।
मुरझाते हुए फूलों को देखकर मैं,
लंबे समय तक उदास रहा।

- भगवान सिंह चारण (डीडवाना)
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
13 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर