आज नया साल है
आज नया साल है
आंखों में सपना
उमंग बेमिसाल है
इस नये साल में
जाने क्या होगा
प्रभु ने चाहा, तो
सब अच्छा ही होगा।
आंखो के सपने
कैसे पूरे होंगे ?
क्या दिन-रात
सुनहरे होंगे?
क्या कुछ नई
कहानी गढ़ पाऊंगा।
दुखियों के दुःख
क्या हर पाऊंगा?
सिमटे अधरों की लाली को
क्या चमक गुलाबी दे पाऊंगा?
ऐसे कितने प्रश्नों की माला
से मन पूरा ढका पड़ा है ।
पर अपनी इच्छाशक्ति भी
इनके आगे अड़ा खड़ा है।
प्रभु की कृपा रही तो, प्यारे!
माला प्रश्नों की माला होगी
जो मन पर बोझ सरीखे थी
अब खुशियां बरसाती होगी।
जो-जो सपने पाले हमने
सारे के सारे पूरे होंगे ।
अंधेरों पर लाली मुस्काती
मस्त गुलाबी हम भी होगें ।
Beer Bahadur Singh
Assistant Professor
Department of Mathematics & Statistics
Dr.Rammanohar Lohia Avadh University Ayodhya
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
कमेंट
कमेंट X