अलमारी के कोने पर देखा बस्ता
बचपन सारा खोने पर देखा बस्ता
टूटी पेंसल कुछ पन्नो को साथ लिए
कतरा कतरा होने पर देखा बस्ता
छोटी सी इक टाई पर इक बैच लगा
यादें धूमिल होने पर देखा बस्ता
छोटे छोटे टुकड़ो में कुछ रंग पड़े
रंग हज़ारो खोने पर देखा बस्ता
कागज़ की इक नाव साथ पतवार लिए
मौसम सारे खोने पर देखा बस्ता
उलटी सीधी शक्ल बनाई यारो की
यार पुराने खोने पर देखा बस्ता
चूरन पुड़िया टॉफी के अवशेष मिले
जीवन खट्टा होने पर देखा बस्ता
गाढ़ी स्याही से था उसपर नाम लिखा
सारी यादें धोने पर देखा बस्ता
कागज़ में लिपटी थी इक तस्वीर मिली
जिसका बस्ता ढोने पर देखा बस्ता
ग्रीटिंग के कुछ कार्ड संभाले रखे थे
कितने साल गुजरने पर देखा बस्ता
बचपन के लम्हात अभी तक है ज़िंदा
खुद को बूढ़ा होने पर देखा बस्ता
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