चलो उठो एक नयी सुबह की तलाश करते हैं
वक़्त के तक़ाज़ों पर अब चलो थोड़ा अभ्यास करते हैं
-वो मर्यादा के बंधन में रखकर बंधन में रखकर बांधना चाहेंगे तुम्हें
वो शर्म के परदे में रखकर ढाँपना चाहेंगे तुम्हें
वो कभी अपनी इज़्ज़त का भी वास्ता देंगे तुम्हें
वो कभी ग़ैरों की ज़िल्लत का भी वास्ता देंगे तुम्हें
लेकिन जो हों पक्के इरादे तो उनकी कभी न सुन्ना तुम
ज़िन्दगी गुज़ारनी है कि ज़िन्दगी जीनी है सोच समझकर चुनना तुम
तम्हारे क़दमों के निशां से एक कारवां चलेगा
क़दम दर क़दम तुम्हें ज़िन्दगी का साथ मिलेगा
हज़ारों तंज हज़ारों गालियां बरसेंगी तुमपे
नाराज़ होगा तमाम जहां लोग भड़केंगे तुमपे
लेकिन अपने इरादों कभी अधर में ना छोड़ना तुम
हो सके तो उस वक़्त की ज़ंजीर को ज़रूर तोड़ना तुम
पर नहीं हौसलों से ही तो परिंदे परवाज़ करते हैं
क्या मुश्किल है अगर मुश्किल है राह तो एक मर्तबा और प्रयास करते हैं
चलो उठो एक नयी सुबह की तलाश करते हैं
वक़्त के तक़ाज़ों पर अब चलो थोड़ा अभ्यास करते हैं
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