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पता नहीं उसे क्या नज़र आता होगा।

                
                                                         
                            वो हुस्न की परी है ,
                                                                 
                            
चांद भी उसे देखकर जल जाता होगा।

जो खिलखिलाकर वो हँस दे ,
सूरज भी बादलों में कही छुप जाता होगा।

उसके नखरे , सावित्री जैसे जिद्दी है,
जिसके सामने स्वयं यमराज भी झुक जाता होगा।

उसके लहराते बाल मानो समुद्र की लहरें हो,
कोई कैसा भी तैराक हो, एक वक्त बाद उसमें डूब जाता होगा।

उसकी कमर,नाखून,मोती सी आंखे सब कुछ ला जवाब है,
वो पूरी रति जैसे है , कामदेव भी जिसे देखकर शरमा जाता होगा ।

सारा जमाना पागल है उस पर, पर वो मेरे लिए पागल है।
सोचता हूं ऐसा क्या है मुझमें , पता नहीं उसे क्या नज़र आता होगा।

बसंत पंवार प्रजय...
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10 महीने पहले

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