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मैं जिसको अपना अंत समझता

                
                                                         
                            तुमसे प्रेम किया तो जाना,
                                                                 
                            
प्रेम सदा आसान नहीं होता,
जिसे हृदय में देव बसाएँ,
वह हर पल करुणामय नहीं होता।

मैंने दीप जलाए रातों में,
तेरे नाम की लौ लेकर,
तुम चुपचाप खड़े रहे प्रभु,
मेरी पीड़ा को सब कुछ देकर।

आँखों में जो नीर भरा था,
वह भी तुमसे कहता था,
टूटे मन का हर इक टुकड़ा,
बस तेरा ही नाम रटता था।

कितनी बार पुकारा तुमको,
कितनी बार गिरा तेरे द्वार,
तुमने फिर भी हाथ न थामा,
हो गए क्यों इतने निष्ठुर भगवान ?

पर अब समझा तेरी चुप्पी,
तेरा मौन भी प्रेम रहा,
मैं जिसको अपना अंत समझता,
वही तुम्हारा नेम रहा।

तुमने मुझको दर्द दिया तो,
दर्द में तेरा ध्यान मिला,
छीन लिया जब जग ने मुझको,
तब तेरा ही नाम मिला।

निष्ठुर हो या दयालु प्रभु,
तुमसे ही मेरा नाता है,
तुम ठुकराओ, फिर भी मन यह,
तेरे चरणों में लौट आता है।

मुझको सुख का वरदान न देना,
बस इतना उपकार करो—
जब अंतिम साँस चले मेरी,
तब भी तुमसे प्यार रहे।
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40 मिनट पहले

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