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आओ रे मोहन आओ

                
                                                         
                            आओ रे मोहन आओ – 2
                                                                 
                            
मधुसूदन, माखनचोर, मोहनमुरारी
  मुँह से माखन की मटकी खोलो।
मधुर-मधुर मुस्कान बिखेरो,
  मेरे मन के बंद कपाट तुम खोलो।
मोरपंख सिर ऊपर साजे,
  पीताम्बर तन पर लहराओ।
चरणों में पायलिया छनके,
  मधुबन में मधुर राग सुनाओ।
आओ रे मोहन आओ – 2
दीनदयाल, दीनानाथ, दयासागर,
  दीनों के तुम कष्ट मिटाओ।
जो भी तेरे द्वार पे आए,
  उसकी झोली खुशियों से भर जाओ।
कंस विनाशक, धर्म रक्षक,
  अधर्म का अंधकार मिटाओ।
कलियुग के इस कठिन समय में,
  गीता का फिर ज्ञान सुनाओ।
आओ रे मोहन आओ – 2
मन में मेरे प्रेम जगा दो,
  तन-मन अपना नाम रटाओ।
राधे-राधे नाम की धुन पर,
  जीवन की हर साँस सजाओ।
हे नन्दलाला, हे गोपाला,
  मेरे आँगन एक बार तो आओ।
बरुण की विनती सुन लो मोहन,
  अपने चरणों में मुझको बसाओ।
आओ रे मोहन आओ – 2
आओ रे मोहन आओ – 2
- बरुण कुमार दूबे
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
50 minutes ago

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