मेरी नज़रों से ओझल न हो एक भी पल
मेरा दुनिया में कोई सहारा नहीं।
तेरा दीदार ही मेरी धड़कन बनी
दूसरा दिल का कोई मसीहा नहीं।
ज़िंदगी खूबसूरत बहोत है मगर
तेरे बिन ज़िंदगी भी है मय्यत मेरी।
मेरी सांसों की ताज़ा हवा बन के आ
तू फ़िज़ा में नहीं तो फ़िज़ा कुछ नहीं।
चांदनी रात में तुम निकलना नहीं
चाँद की रौशनी मात खा जाएगी।
आप निकलें जो गलियों की जानिब मेरी
मेरी तक़दीर में कुछ अँधेरा नहीं।
किस तरह से मैं एहसास ज़ाहिर करुँ
किस शकल में मैं तारीफ तेरी करूँ।
तेरी रंगत से हर सू है इक जश्न सा
तेरी सीरत सा दुनिया में कोई नहीं।
मेरी हर बार है इल्तेजा आपसे
सिर्फ एक बार कह दो की है ये मेरा।
लाख एहसान होगा तेरा उम्र भर
अयेसे एहसान का कोई बदला नहीं।
-बदरे आलम खान
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