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आधुनिक बीवी हास्य कविता

                
                                                         
                            सीधा साधा हरियाणावी छोरा modern छोरी के चक्कर में पड़ गया
                                                                 
                            

वो बोला था तेरे खातिर चाँद तारे भी तोड़ लाऊँ
मै बोली चाँद छोडो तुम जरा दो बोतल beer लाओ
मैं मॉडर्न इस जमाने की मुझे चंदू ना समझो तुम
अँधेरे मे मेरे खातिर दो pag बना लाओ

मैं सोचा था मेरे आने पर पैर मेरे दबाओगी
पति को ईश्वर मानोगी और उपहार लाओगी
पड़ा उल्टा मेरा पासा मुझी से पैर दबवाओगी
मेरे बच्चो को गोदी देके shopping मॉल जाओगी

उसे सपने मे जी भर के घूँघट में देखा था
नए पकवान बनाकर परोसते मैंने सोचा था
पर उसकी hot pant ने सदमें में मुझको डाला है
मैं होता हूँ रसोई घर वो होती मधुशाला है

ये सोचा था अकेले में ए जी कह कर बतलायेगी
मेरी मर्जी के बिना पत्ता भी ना हिलायेगी
पर मैं ही उसके सुर में सुर मिलाता हूँ
दुबक कर घर में रहता हूं जोरू का गुलाम कहलाता हूँ
Veer Babita singh
Haryana


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7 वर्ष पहले

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