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विकास और अवसाद

                
                                                         
                            बैलगाड़ी युग से हवाई जहाज तक
                                                                 
                            
कच्चे मकानों से ऊंची अट्टालिकाओं तक
कच्ची सड़कों से सीमेंट की सड़कों तक
ऊंचे ऊंचे पुलों ,फ्लाइव ओवर , भाप के इंजन से बुलेट ट्रेन तक
विकास की बहती सतत धारा ले आई इंटरनेट युग तक
जिधर देखें विकास ही विकास पर मानव असंतोष बेचैनी से भरा है भीतर तक
ये बेचैनी ,ईर्ष्या असंतोष ,कॉम्पिटिशन ले जा रही अवसाद तक
ढूंढे शांति योग प्राणायाम साधना ध्यान में , तो पहुंच जाए मंजिल तक.....
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2 वर्ष पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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