कोई खूबी ना सही कोई खामी तो बताएं ,
मेरे इन खतों के नुक्ता,जेर,जबर,पेश बताएं।
लिखना तो आता नहीं, मैं फिर भी लिखे चले जा रही हूं,
कोई गलती की सजा हो तो वो ही बताएं।
कोई खूबी ना सही कोई खामी तो बताएं ,
मेरे इन खतों के नुक्ता,जेर,जबर,पेश बताएं।
मैं कलम को इत्र में डूबा कर चलाई हूं,
ये पसंद ना सही अपनी पसंदीदा खुशबू तो बताएं।
कोई खूबी ना सही कोई खामी तो बताएं ,
मेरे इन खतों के नुक्ता,जेर,जबर,पेश बताएं।
मुझ में ना इल्म है ना तालीम है ना ही आलिम हूं ,
तुम तो मोअल्लिम हो मुझे मुताअलीम तो बनाएं।
- अज़रा नाज़
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