जड़ें इतनी गहरी व सूक्ष्म के, मिट्टी से भी जल खींच ले,
गुरुत्व इतना न्यून के, समुद्र में भी डुबोने की ताकत न हो,
पत्थरों को भी आवाह्न, राही को भी सुकून,
वृक्ष बने रहना, फलदार भी छायादार भी!
- आयुष
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