भूल गया तू, नाता क्या है?
मन! इतना घबराता क्या है?
सिद्ध अस्त्र तू मेरा मुझसे,
दूर दूर यूं जाता क्या है?
डर कैसा? मैं हूं तो बैठा,
साक्षी, नियंत्रक घट में पैठा,
अहम को लगता, युद्ध बड़ा है,
देख तो पीछे, राम खड़ा है,
वही राम जो स्वयं सत्य है!
वही जो होकर भी अकथ्य है!
~ आयुष
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