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कविता - माँ खाना बना रही है

                
                                                         
                            माँ खाना बना रही है
                                                                 
                            
बच्चे को झिड़ककर कहती है- उधर ही रहो
रसोई में मत आओ !!

गर्मियों का मौसम..
हवा गरम, चूल्हा गरम
रसोई की दीवारें, छत सब गरम
माँ ये सारी गर्मी खा रही है
माँ आँच को
बच्चे तक न जाने के लिए समझा रही है !!

बच्चा दूर है अलग कमरे में
माँ उसे वहीं पर रोटी दे जा रही है
माँ बच्चे पर स्नेह की ढाल बना रही है
माँ बच्चे को गर्मी से बचा रही है
माँ ममता से बच्चे का पेट भर रही है
माँ खाना बना रही है !!
-अवतार सिंह अक्षरजीवी
 
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3 महीने पहले

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