इन अँधेरों के नगर में भी उजाला आयेगा ।
टूटते ख्वाबों के हिस्से में बसेरा आयेगा ।
आज काँटों से भरी है राह की सारी ज़मीं,
कल इन्हीं राहों पे कोई फूल महका आयेगा ।
दरमियां जो धूप के हैं खड़े लेकर थकन ,
उनके माथे पर भी इक दिन ठंडा साया आएगा ।
जिन लबों पर आज चुप्पी की हुक़ूमत है अभी ,
वक़्त बदलेगा तो उनका भी तराना आएगा ।
जो गिरे हैं उनका गिरना आख़िरी मंज़िल नहीं ,
धूल झाड़ेंगे तो फिर उठने का मौक़ा आयेगा ।
आज मेहनत बेसिला लगती है तो मायूस मत हो ,
कल तेरे हाथों में मेहनत का नतीजा आयेगा ।
रात कितनी भी घनी हो रात ठहरी है कहाँ,
एक दिन सूरज तेरे आंगन में ठहरा आयेगा ।
स्पर्श अपनी कोशिशों को तू इबादत मान ले ,
देर होगी पर तेरे हिस्से उजाला आयेगा ।
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