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मा की मोहब्बत

                
                                                         
                            सूरज की पहली किरणों की नयन मिचोली जैसी मां
                                                                 
                            
मंदिर के घंटी से आती भजन की बोली जैसी मां

बहकाने पर बहकने वाली बच्चों जैसी भोली मां
पापा कहते थे मुझसे की दुल्हन की डोली जैसी मां

पूजा की थाली में फबती चंदन -रोली जैसी मां
दूध मलाई मिश्री वाली मीठी गोली जैसी मां

तेज दुपहरी में आँचल की छाया देती जैसी मां
जिस धुन पर आ जाये निंदिया मीठी लोरी जैसी मां

मिलती थी जिसमें सारी खुशियां वो एक रुपअइया जैसी मां
ईद दिवाली पर महकी सी पकी सेवंअइया जैसी मां

हर मुशकिल का हल निकाल दे गणित के भइया जैसी मां
सरस्वती- दुर्गा -लक्ष्मी -काली मइया जैसी मां

डूबती नइया भी पार लगा ले प्रखर खेवअइया जैसी मां
सब मुशकिल आसान लगे यूँ हरे बलअइया जैसी मां
- अतुल सिंह मृदुल
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एक घंटा पहले

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