आदमी कौन है
मैं भी हूूूं आदमी,
तू भी है आदमी
आदमी आदमी है,
आदमी के लिये।
आदमी तब आदमी नहीं,
जब आदमी न हो
आदमी के लिये।
यह भी है आदमी
वह भी है आदमी
सभी है आदमी कहने के लिये।
आदमी की रात बीतती नहीं
आदमी की बात बीतती नहीं
आदमी है कमाल
कमाल का है आदमी।
बडा प्यासा है आदमी
बड़ा उदासा है आदमी
एकता से डरता आदमी
रंग देख ढंग बदलता आदमी
आदमी है चाटुकार
चाटुकार का है आदमी।
युग की पुकार है
आदमी से गुहार है
पीव जीवन का रस बहे
दुनिया में रहे ऐसे ही आदमी।
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