शत कोटि नमन उन वीरों को
इस देश के उन रणधीरों को!
जो करते न कभी आराम हैं
और करते निरत सब काम हैं।
सहते सर्दी, गर्मी, बरसात
करते सेवा निष्ठा से अपार।
चाहे हो दिन या रात अधिक
या हो पीड़ा, बुखार अधिक।
सह धूप, ठंड, वर्षा, प्रस्तर
रहते सदैव कार्य में तत्पर।
चाहे पद से व्यापारी हो
या पद से सरकारी हो।
चाहे निजी कर्मचारी हो
या कृषक, कर्मकारी हो।
चाहे शिक्षक, सैनिक हो
या पुलिस, मैकेनिक हो।
चाहे डॉक्टर, अभियंता हो
या न्यायमूर्ति, अधिवक्ता हो।
चाहे लोहार, सोनार हो
या मुंशी, डाक, कुम्हार हो।
चाहे सचिव, अन्वेषी हो
या बैंकर, विद्युत कर्मी हो।
चाहे गायक, संगीतकार हो
या लेखक, रचनाकार हो।
चाहे चित्रकार, संपादक हो
या पत्रकार, प्रकाशक हो।
चाहे स्वच्छता सहकर्मी हो
या खोजकर्ता, गृहिणी हो।
चाहे एथलीट, अभिनेता हो
या शासक विश्व चहेता हो।
चाहे विद्वान, पुजारी हो
या युद्ध कौशल में भारी हो।
चाहे वाहन चालक हो
या कैप्टन, पायलट हो।
चाहे समाज सुधारक हो
या धर्म-कर्म प्रचारक हो।
बहाकर अपना खून-पसीना
करते सरल हैं, सबका जीना।
इस देश को यही चलाते हैं
ये सब महान कहलाते हैं।
शत कोटि नमन इन वीरों को
भारत मां के रणधीरों को!
शत कोटि नमन इन वीरों को
इन कोहिनूर हीरों को!
जिन्होंने न कभी विश्राम किया
इस देश का सदा उत्थान किया।
-अथर्व तिवारी
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