धूप वही है, रुप वही है,
सूरज का स्वरूप वही है;
केवल उसका आभाष नया है,
किरणों का एहसास नया है.
रीत वही है, मीत वही है,
जीवन का संगीत वही है;
केवल अपना राग नया है,
मित्रों का अनुराग नया है.
नाव वही, पतवार वही है,
बहते जल की धार वही है;
केवल नदी का किनारा नया है,
इस जीवन का सहारा नया है.
खेत वही है, खलिहान वही है,
मेहनतकश किसान वही है;
केवल उपजा धान नया है,
धरती का परिधान नया है.
मन वही है, तन वही है,
मेरा प्यारा वतन वही है;
केवल अपना कर्म नया है,
मानवता का धर्म नया है.
- अशोक बजाज
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