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शायद ये खामोशी कुछ ऐसे बयान होती है,,,

                
                                                         
                            बिना शब्दों के भी एक जुबां (जुबान ) होती है ,,,
                                                                 
                            
शायद ये खामोशी भी कुछ ऐसे बयान होती है,,
शब्दों से कुछ न कहकर जाहिर कर रहा हूं खुद को मैं,,
इस बेजुबान कलम की स्याही में भी जुबान होती है,,
शायद ये खामोशी कुछ ऐसे बयान होती है,,,
चल रहा है सफर जीवन का खुद की गुमशुदगी में,,
बीत रहा है हर पल कभी खुशी और कभी गम में,,
कभी खुशी के उजाले में तो कभी गम के साये में
हमेशा मौन सी ये मुस्कान साथ होती है,,,
शायद ये खामोशी कुछ ऐसे बयान होती है,,,
आज है ये आंखे नम इन खामोश सपनों से..
पर इस नमी में पलकों रूपी बादलों से इन सपनों में हर रोज एक नई बरसात होती है,,,
शायद ये खामोशी कुछ ऐसे बयान होती है,,,
इन कोरे कागज पर कुछ न कहकर सबकुछ कहना,,,
कुछ पन्नों में कुछ न लिखकर सबको सबकुछ लिखने देना,,,
इस लिखावट को देखकर दिल की धड़कन में एक आहट होती है,,,
शायद ये खामोशी कुछ ऐसे बयान होती है,,,
चल रहा है ये सफर इस जीवन से पता नहीं,,
या फिर चल रहा है ये जीवन इस सफर से पता नहीं,,
कुछ पूरा है इस अधूरेपन से पता नहीं,,,
या फिर अधूरापन पूरा है मेरा पता नहीं,,,
पर मेरी खुदी की खुद से पहचान होती है,,,
शायद ये खामोशी कुछ ऐसे बयान होती है,,,
शायद ये खामोशी कुछ ऐसे बयान होती है,,,
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50 मिनट पहले

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