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हवा न जाने कैसी है

                
                                                         
                            ये हवा तो न जाने ये हवा कैसी है,,,
                                                                 
                            
कभी तो ये हवा ऐसी है,,,
कभी तो ये हवा वैसी है,,,
ये हवा तो हवा के जैसी है,, हवा के जैसी है,,,
कभी तो ये चलकर बादल से नीर को लाती है,,,
तो कभी भरी गर्मी में लू बनकर प्यासे को सताती है,,,
कभी फूल की महक से खुद सबके मन को महकाती है,,,
तो कभी बदबू से मिलकर जी को मचलाती है,,,
ये हवा तो न जाने ये हवा कैसी है,,,
कभी विरोध में चलकर विरोधाभास करवाती है,,,
तो कभी साथ चलकर हमसफर साथी बन जाती है,,,
कभी जीवनरूपी इस नाव का सहारा बन जाती है,,,
तो कभी इस नाव को भंवररूपी तूफान में फंसाती है,,,
कभी ये हवा सावन के महीने में सजती और संवरती है,,,
तो फिर कभी आंधी और तूफान बनकर बिगड़ती है,,,
कभी ये सांसों में रुककर जी को मचलाती है,,,
तो कभी ये हवा सांसों से सांसों में चलकर जीवन को चलाती है,,,
ये हवा तो न जाने ये हवा कैसी है,,,
कभी तो ये हवा ऐसी है,,,
कभी तो ये हवा वैसी है ,,,
ये हवा तो हवा के जैसी है,,, हवा के जैसी है,,,
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एक घंटा पहले

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