इस देश में जाने कितनो ने
माँ की रक्षा खातिर
जीवन दिया गवाई
तन छलनी हुआ था उनका
लड़ रहे थे फिर भी लडा़ई
बह रहा लहू था फिर भी
जय माँ की चीख लगाई।।
रिपु सेना खडी़ थी परिता
था उनके हाथ तिरंगा
बह रहा कदम था उनका
रही गोली शोक बनाई ।।
कितनी मां की संतति ने
दिया फांसी तन लटकाई। ।
आशीष पाण्डेय
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